Thursday, May 6, 2021
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बेकसूर होते हुए भी सज़ा भुगतने वालों को सुप्रीम कोर्ट से है न्याय की उम्मीद

(शिब्ली रामपुरी)

देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. यह याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की है.जिसमें कहा गया है कि जो लोग जेल में बेक़सूर होते हुए भी सजा भुगतते हैं उनको मुआवजा दिया जाना चाहिए और इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए कि वह ऐसे विक्टिम को मुआवजा देने के लिए गाइडलाइन तैयार करें और इस बाबत लॉ कमीशन की रिपोर्ट को लागू करें. सर्वोच्च अदालत में उत्तर प्रदेश के विष्णु तिवारी केस का हवाला दिया गया है.इसमें दो राय नहीं है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां सभी को न्याय मिलता है वहीं कुछ ऐसे मामले भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं कि जिन को देखकर यह एहसास होता है कि काफी कुछ न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में किया जाना चाहिए. यह वह मामले हैं जिनमें किसी व्यक्ति को कई साल तक जेल में रहने को मजबूर होना पड़ता है उसको उस जुर्म की सजा मिलती है जो उसने किया ही नहीं था और ऐसा नहीं है कि कुछ चंद दिन ही बल्कि एक लंबे वक्त तक बहुत से लोगों को जेल में रहने को मजबूर होना पड़ा और जब उनको न्याय मिला अदालत से वह बाइज्जत बरी हुए तब पता चला कि यह लोग तो बिल्कुल बेकसूर थे इनको तो उस जुर्म की सजा मिल रही थी कि जो इन्होंने कभी जीवन में किया ही नहीं था. सुप्रीम कोर्ट में जिस मामले का हवाला दिया गया है वह मामला विष्णु तिवारी का मामला है जिनको दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाया गया था और उनको इस झूठे केस की वजह से 20 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने को मजबूर होना पड़ा और 20 साल बाद उनको अदालत द्वारा बाइज्जत बरी किया गया. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 28 जनवरी 2021 को विष्णु तिवारी को बरी किया था. उन पर आपसी झगड़े की वजह से दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दायर किया गया था और विष्णु तिवारी को 16 सितंबर 2000 को गिरफ्तार किया गया था. उन पर जो एफआईआर दर्ज हुई थी उसके पीछे जमीन विवाद को कारण बताया गया. ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए जनहित याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत गलत अभियोजन के पीड़ित को मुआवजे के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करे और इस संबंध में विधि आयोग की सिफारिशें सख़्ती से लागू हो जाने तक इनके क्रियान्वयन के लिए केंद्र एवं राज्यों को निर्देश दे. हमारे सामने विष्णु तिवारी का कोई अकेला मामला नहीं है बल्कि इससे पहले अनगिनत ऐसे मामले सामने आ चुके हैं कि जिनमें बेकसूर होते हुए भी किसी इंसान को जेल में रहने को मजबूर होना पड़ा है विष्णु तिवारी से पहले एक और ऐसा ही चर्चित मामला सामने आया था जिसमें दिल्ली के एक युवक आमिर को जेल भेजा गया था जिसने लंबे वक्त तक जेल की सलाखों में अपना जीवन गुजारा और उसको उस जुर्म की सजा दी गई थी कि उसने वो कभी किया ही नहीं था. आखिरकार उसको भी अदालत से इंसाफ मिला लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी उसकी माली हालत भी विष्णु की तरह काफी खराब हो गई थी उसके पिता का देहांत हो चुका था और मां लकवाग्रस्त हो गई थी. कुछ दिन पहले दिल्ली के आमिर ने अपने साथ हुए इस पूरे घटनाक्रम पर एक किताब भी लिखी है. विष्णु तिवारी हो या आमिर किसी के साथ भी नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए और यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसी इंसान को कई साल तक जेल में उस जुर्म के लिए कैद रहना पड़े कि जो उसने कभी किया ही नहीं था. हमारे देश की जो लोकतांत्रिक व्यवस्था है उसकी मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है और यहां पर सभी को इंसाफ मिलता है और अदालतों में सभी को अपनी बात पूरी तरह से रखने का मौका भी मिलता है लेकिन यहां यह कहना भी गलत नहीं होगा कि विष्णु तिवारी और आमिर जैसे मामले भी हमारे सामने आते हैं जो यह बताते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया में काफी कुछ होने की अभी जरूरत है और जो लोग बेकसूर होते हुए भी जेल में रहने को मजबूर होते हैं उनका गुजरा हुआ समय तो वापस नहीं आ सकता है लेकिन ऐसी व्यवस्था जरूर की जानी चाहिए ताकि इन बेकसूर लोगों का जेल के बाद का जीवन आराम से गुजर सके और उनके जख्मों पर किसी भी तरह से मरहम लग सके. हालांकि प्रयास तो यह किए जाने चाहिए कि किसी निर्दोष इंसान को एक साल तो क्या एक पल भी जेल में रहने को मजबूर ना होना पड़े. हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी बेकसूर इंसान का जेल में रहना बेहद ही दुखदायक और अफसोसनाक है. कई बार द्वेष भावना या किसी आपसी रंजिश के चलते कुछ दबंग किस्म के लोग किसी गरीब के खिलाफ कोई झूठा मुकदमा लिखवा देते हैं और फिर वह गरीब सही तरह से अपने लिए इंसाफ की जंग नहीं लड़ पाता.क्योंकि यह भी एक सच्चाई है कि इंसाफ की जंग लड़ना धीरे-धीरे काफी महंगा होता जा रहा है और अब यह गरीब आदमी के हैसियत से बाहर की बात बन चुका है इसके लिए विष्णु तिवारी के मामले पर ही गौर करें तो विष्णु तिवारी की काफी जमीन उसके लिए इंसाफ की पैरवी करते करते बिक चुकी थी. ऐसे में बेकसूर इंसान का कानूनी जंग लड़ना कितना मुश्किल होता होगा इसका अंदाजा लगाना भी बेहद कठिन है अब ऐसे में देश की सबसे बड़ी अदालत से जनता को बहुत आस है कि वह ऐसे दिशा निर्देश जारी करेगी कि जिससे किसी भी बेकसूर व्यक्ति को सज़ा ना मिल सके और अगर भूलवश या किसी गलती की वजह से कोई बेक़सूर व्यक्ति जेल चला भी जाता है और जब उसको इंसाफ मिलता है तो उसके बाद की उसकी जिंदगी आराम से गुजर सके ऐसी व्यवस्था की जानी बेहद जरूरी है.

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