Wednesday, June 16, 2021
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क्या पत्रकारों की आवाज दबा रही है दिल्ली सरकार

(शिब्ली रामपुरी) 

दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने संपादकों की संस्था एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को खत लिखा है.जिसमें उन्होंने दिल्ली सरकार की शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार पत्रकारों की आवाज को दबाने का काम कर रही है. मनोज तिवारी पत्र में लिखते हैं कि पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों के सामने सूचनाएं और सच लाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दिल्ली सरकार पत्रकारों की आवाज को दबाने की कोशिश में जुटी हुई है.उन्होंने यह पत्र सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है. संस्था को लिखे पत्र में सांसद मनोज तिवारी ने लिखा है कि देश के बड़े मीडिया समूह ने केजरीवाल की लापरवाही पर रिपोर्ट छापी इसके बाद संस्थान के 6 पत्रकारों को केजरीवाल सरकार ने कॉमन व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर कर दिया.इस ग्रुप के जरिए दिल्ली सरकार रोज का अपडेट पत्रकारों से शेयर करती है.यहां कुछ सवाल पूछने पर कॉमन प्लेटफार्म से रिपोर्ट्स को बाहर कर दिया गया. भाजपा सांसद मनोज तिवारी का यह भी आरोप है कि चुभने वाले सवाल उठाने के लिए पत्रकारों को पहली बार इस ग्रुप से बाहर नहीं किया गया है बल्कि इससे पहले भी कई पत्रकारों को बाहर किया जा चुका है. दिल्ली सरकार इस तरह से सभी पत्रकारों पर दबाव बनाने का काम कर रही है. हैरत की बात है कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया. उन्होंने पत्र में लिखा है कि मुझे उम्मीद है कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया दिल्ली सरकार के इस रवैए पर संज्ञान लेकर ऐसे कदम उठाएगी जिससे पत्रकार बिना दबाव और डर के अपना काम बेहतर तरह से कर सकें.
दिल्ली के अलावा कई और जगहों से भी काफी समय से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि जिससे इस बात का पता चलता है कि किसी ना किसी तरह से पत्रकारों को परेशान किया जा रहा है और सच दिखाने की क़ीमत कई पत्रकारों को चुकानी भी पड़ी है. भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सभी को हक है जिसमें पत्रकार भी आते हैं लेकिन अफसोस की बात है कि काफी समय से कुछ ऐसे लोग पत्रकारों पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं कि जो दबंग क़िस्म के होते हैं या फिर कोई पत्रकार अगर सरकार की कोई नाकामी सामने लाने का प्रयास करता है तो उसको भी तरह तरह की परेशानियों का सामना करने को मजबूर होना पड़ता है. कोरोना संकट के दौर में यूं तो सभी को भारी परेशानियों के दौर से गुजरना पड़ रहा है. लेकिन यदि हम पत्रकारों की बात करें तो अब तक काफी संख्या में पत्रकार अपनी जान गवा चुके हैं कोरोनावायरस उनको चपेट में ले चुका है तो कई पत्रकारों का आज भी कोरोना की ज़द में आने की वजह से इलाज चल रहा है. इसके अलावा यदि वर्तमान समय में हम पत्रकारिता की बात करें तो पत्रकारिता करना तो हर दौर में चुनौतीपूर्ण रहा है लेकिन कोरोना संकट के दौर में पत्रकारिता करना काफी मुश्किल भरा काम हो गया है. जहां तक निष्पक्ष पत्रकारिता की बात है तो कई नामवर पत्रकारों को विभिन्न टीवी चैनलों में जब समझौता करने को मजबूर होना पड़ा तो उन्होंने अपने उसूलों से समझौता करने की बजाय उस संस्थान को अलविदा कहने में देर नहीं लगाई और आज ऐसे कई पत्रकार सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के जरिए अपनी बात रख रहे हैं और सच को सामने ला रहे हैं. जहां तक इमानदार पत्रकारिता की बात है तो हर किसी को पत्रकारों से उम्मीद होती है और होनी भी चाहिए और पूरी ईमानदारी के साथ पत्रकारिता का कार्य किया जाना चाहिए लेकिन यह एक कड़वी सच्चाई है कि हम समय-समय पर देखते हैं कि कुछ इमानदार पत्रकारों को किस तरह से परेशानियों के दौर से गुजरने को मजबूर होना पड़ता है तो ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह ऐसे पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ऐसे प्रयास करें कि जिससे पत्रकारों पर किसी तरह का दबाव ना हो और वह पूरी स्वतंत्रता के साथ अपने कार्यों को अंजाम दे सकें. जहां तक दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी के पत्र की बात है तो संपादकों की संस्था एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को उनके पत्र को संजीदगी से लेते हुए इस पूरे मामले की जांच करानी चाहिए और यदि ऐसा पाया जाता है कि दिल्ली सरकार वाकई पत्रकारों की आवाज दबाने का कार्य कर रही है तो इस और काफी गंभीरता से सोचा जाना चाहिए.

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