Friday, July 30, 2021
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दहेज को दरकिनार कर मिसाल क़ायम करने वाले लोग

  (शिब्ली रामपुरी) 

दहेज के लालची लोगों की करतूत एक के बाद एक सामने आती रहती हैं जिससे पता चलता है कि दहेज की आग में समय-समय पर किस तरह से रिश्ते जलते रहते हैं तो वहीं कुछ ऐसी खबरें भी सामने आती हैं जो दिल को बहुत सुकून पहुंचाती हैं और पता चलता है कि इस दौर में जब दहेज के लालची लोगों द्वारा एक के बाद एक गलत कारनामों को अंजाम दिया जाता है ऐसे दौर में ऐसे लोग भी हैं कि जो दहेज को दरकिनार करके विवाह करते हैं और उनको जब दहेज में लाखों रुपए दिए भी जाते हैं तो वह उन लाखों रुपयों को पूरी तरह से नकार देते हैं और कहते हैं कि हमारे लिए तो दुल्हन ही दहेज है हमको कुछ नहीं चाहिए.राजस्थान के सीकर में कुछ दिन पहले ऐसा ही एक मामला सामने आया जब दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए एक परिवार ने बड़ी मिसाल पेश की यहां पर डॉ अनिल की शादी हो रही थी तो डॉक्टर अनिल के घर वालों ने दहेज को पूरी तरह नकार दिया उन्होंने गांव के राज्य के स्कूल की प्रधानाचार्य को 15 हज़ार का चेक बालिका शिक्षा के लिए दिया इतना ही नहीं लड़के वालों की ओर से दुल्हन नीलम को मुंह दिखाई में दस लाख रुपए की कार गिफ्ट दी गई ऐसा करके अनिल के परिवार ने समाज में संदेश दिया कि दहेज को समाप्त करने के लिए सिर्फ जुबानी बातों से कुछ नहीं होगा बल्कि इसके लिए आगे बढ़कर बुनियादी तौर पर कार्य करने की जरूरत है. दहेज के बगैर शादी का एक और मामला बिहार में सामने आया था जहां पर पश्चिम चंपारण जिले के एक गांव में इंजीनियर ने बिना दहेज शादी कर सरकार के दहेज मुक्त समाज की परिकल्पना को साकार करने के काबिले तारीफ नारे को बुलंद किया. इंजीनियर मोहम्मद अबूशाद का निकाह नरकटियागंज के हसनपुर निवासी शेख बहार की बेटी के साथ संपन्न हुआ. यह शादी बगैर दहेज के हुई और यहां यह बात भी काबिले गौर है कि इंजीनियर के रिश्ते पहले कई बड़े घरानों से आए लेकिन उन्होंने गरीब घर में शादी की और वह भी बगैर दहेज के की. इस शादी में दहेज लेने की बजाय दूल्हा पक्ष ने मेहर के तौर पर साढ़े 10 तोला सोना दुल्हन को अदा किया.
सहारनपुर में भी एक ऐसी ही मिसाल लड़के वालों की ओर से पेश की गई थी जिसमें दहेज को पूरी तरह से नकार दिया गया था.सहारनपुर के नानौता क्षेत्र के मोरा गांव स्थित किसान इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य ठाकुर गरजा सिंह के पौत्र तथा भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रविंद्र पुंडीर के भाई विवेक प्रताप सिंह ने बगैर दहेज के शादी कर समाज में मिसाल पेश की थी.दरअसल 11 दिसंबर 2020 को मुजफ्फरनगर के पीपलहेड़ा गांव में संपन्न हुई शादी के दौरान वधु पक्ष द्वारा दहेज में दिए गए पांच लाख की रकम को उन्होंने लौटा दिया था और सिर्फ शगुन के तौर पर मात्र चांदी का एक रुपया ही लिया था. उनके इस कदम की वर तथा वधू पक्ष के लोगों द्वारा जमकर सराहना की गई. आज समाज में दहेज का चलन तेज़ी से बढ़ चुका है और इसको उखाड़ फेंकने के लिए कई प्रयास भी किए जा रहे हैं.ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक अभियान चलाया जा रहा है जिसमें दहेज से होने वाले नुकसान बताए जा रहे हैं और दहेज किस तरह से लोगों की जिंदगियां बर्बाद करता है और इसे कैसे रोकना चाहिए इसके बारे में बोर्ड सोशल मीडिया से लेकर जनता के बीच जाकर भी काफी प्रयास कर रहा है.दरअसल जब तक लोगों के ज़मीर जागरूक नहीं होंगे तब तक दहेज जैसे दानव को पूरी तरह से समाप्त कर पाना बेहद कठिन कार्य है.

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