Saturday, May 8, 2021
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ज़रूरी है हिन्दू मुस्लिम भाईचारा

(शिब्ली रामपुरी)
मशहूर बात है और यह हकीकत भी है कि यदि आप किसी को कुछ कहेंगे तो फिर सामने वाला भी आपको जरूर कुछ ना कुछ बोलेगा और जितनी उसके अंदर ताकत होगी वह उस अंदाज से आपकी बात का जवाब देगा.लेकिन यहां दो लोगों का जिक्र करना जरूरी है और समझ में नहीं आता कि इन दोनों लोगों को आख़िर परेशानी किस बात से है और इनको किसी ने क्या कहा है. यह काफी गंभीरता से सोचने समझने और ध्यान देने के बाद भी मालूम नहीं होता कि वसीम रिजवी और स्वामी नरसिंह आनंद को एक समुदाय के लोगों ने आखिर कहा क्या है. वसीम रिजवी काफी समय से मुसलमानों के खिलाफ अनाप-शनाप बयान बाजी कर रहे थे लेकिन जब उससे भी उनका मन नहीं भरा गया यूं कहिए कि उनको कोई लाभ नहीं हुआ तो फिर वह कुरान पाक का अपमान कर बैठे और कुरान पाक की 26 आयतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद वसीम रिजवी कुछ दिन तक मीडिया की सुर्खियों में तो आ गए लेकिन उनको सुप्रीम कोर्ट में जिस तरह से अपमान का सामना करना पड़ा वह देखने योग्य है. वसीम रिजवी ने शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि देश की सबसे बड़ी अदालत द्वारा जहां उनको फटकार खानी पड़ेगी वहीं उन पर पचास हज़ार का जुर्माना भी लगाया जाएगा. वसीम रिजवी की याचिका खारिज हुई और अदालत ने उन पर 50000 का जुर्माना लगा दिया.लेकिन अफसोस वसीम रिजवी फिर भी अपनी गलत हरकतों से बाज नहीं आए और उसके बाद भी उन्होंने ना जाने क्या-क्या कहा. वसीम रिजवी ऐसा उस समय कर रहे हैं कि जब उनके परिवार और उनके घर वालों ने उनका पूरी तरह से बायकाट कर दिया है और यहां तक कि उनके भाई ने वीडियो जारी करके कहा था कि वसीम रिजवी से हमारा और हमारे परिवार के किसी भी सदस्य का कोई भी संबंध नहीं है क्योंकि वसीम रिजवी बहुत ही घटिया इंसान हैं. अब बात करते हैं स्वामी नरसिंहानंद सरस्वती की यह खुद को साधु संत कहते हैं. लेकिन काफी गंभीरता से सोचने समझने और ध्यान देने के बाद भी कहीं दूर दूर तक भी यह महसूस होता दिखाई नहीं देता कि कभी इनको मुसलमानों ने कुछ कहा हो या इनका कोई नुकसान किया हो लेकिन बहुत ही अफसोस की बात है कि स्वामी नरसिंह आनंद लगातार मुसलमानों के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं और बल्कि उससे भी बढ़कर वह ऐसी ऐसी घटिया बातें कर रहे हैं कि जिससे मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को लगातार ठेस पहुंच रही है. समझ नहीं आता ऐसा करके स्वामी नरसिंहानंद सरस्वती क्या साबित करना चाहते हैं और क्या हासिल करना चाहते हैं. यह संसार है और यहां पर किसी को किसी से सहमति असहमति हो सकती है लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी एक दायरा है इसका यह कतई मतलब नहीं है कि आप हूल जलूल अनाप-शनाप बातें किसी भी धर्म या उस धर्म की धार्मिक पुस्तकों या उस धर्म के पैगंबर साहब के बारे में करने लगें. यह पूरी तरह से गलत है. यदि ऐसा कोई मुसलमान भी किसी दूसरे धर्म के बारे में करता है तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए. यहां दो लोगों के उदाहरण जरूरी है कभी किसी समय एमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने अनाप-शनाप बयानबाजी की थी जिसके बाद उनको गिरफ्तार किया गया था और काफी दिन तक वह जेल में रहे थे उस समय किसी भी मुस्लिम ने उनके पक्ष में कोई आवाज नहीं उठाई दूसरी मिसाल मशहूर पेंटर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन की है जिन्होंने अपनी पेंटिंग से एक बहुत ही असभ्य/घटिया कार्य किया था जिसके बाद उनका इतना विरोध हुआ कि उनको देश छोड़कर दूसरे देश में पनाह लेनी पड़ी थी और यहां यह बात भी काबिले गौर है कि मकबूल फिदा हुसैन की हिमायत भी कभी किसी मुसलमान ने नहीं की थी बल्कि उनका जबरदस्त तरीके से विरोध किया गया था.क्यूंकि जो भी गलत करे उसका विरोध होना ही चाहिए.सवाल हिंदू मुसलमान का नहीं है बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्यों वसीम रिजवी या स्वामी नरसिंहानंद सरस्वती जैसे लोगों के हौसले बुलंद होते हैं और वह लगातार ऐसी बयानबाजी करते हैं कि जिससे नफरत का माहौल पैदा हो सरकार को चाहिए कि वह ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई वक्त रहते करे.

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