Friday, July 30, 2021
Home Latest News असर दिखाने लगी है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मुहिम

असर दिखाने लगी है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मुहिम

कहीं खड़े होकर खाना खिलाने पर निकाह से इंकार तो कहीं डीजे बजाने पर नहीं पढ़ाया निकाह

    (शिब्ली रामपुरी)

गुजरात के अहमदाबाद की आयशा की दहेज के नाम पर अत्याचार से परेशान होकर ख़ुदकुशी की घटना के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुस्लिम विद्वानों से लेकर सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर दहेज के ख़िलाफ़ एक अभियान छेड़ा हुआ है. जिसके तहत लोगों को शहरों से लेकर क़स्बों और गांव तक में जागरूक किया जा रहा है. जुमे की नमाज से पहले भी लोगों को दहेज की बुराइयों के बारे में समझाया जा रहा है और बताया जा रहा है कि यह एक बहुत ही गंभीर समस्या है जिसका समाधान होना निहायत ही जरूरी है. इसके अलावा बोर्ड की ओर से एक इकरारनामा लोगों तक पहुंचाया गया है जिसमें बहुत सी बातें हैं यदि उन पर अमल किया जाए तो फिर निकाह आसान हो सकता है और जो परेशानियां सामने आ रही है उनका समाधान हो सकता है. जैसे जैसे ये मुहिम आगे बढ़ रही है वैसे इसके कुछ अच्छे नतीजे भी सामने आने लगे हैं. कुछ उदाहरण हमारे सामने हैं

झाँसी के एक इलाक़े में एक शादी में खड़े होकर खाना खिलाया जा रहा था. निकाह पढ़ाने वाले मौलाना ने जब ये देखा तो उन्होंने विरोध किया और निकाह पढ़ाने से इंकार कर दिया. उसके बाद किसी तरह से निकाह पढ़ाया गया.
शामली में डीजे पर नाच गाना हो रहा था तो वहां भी निकाह पढ़ाने से मना कर दिया गया. किसी तरह से नाच गाना बंद किए जाने पर निकाह हो सका. कुछ और जगहों से भी ऐसी ही खबरें सामने आई कि वहां पर भी कुछ ग़ैर रस्मी बातों की वजह से निकाह पढ़ाने से इंकार किया गया.ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जब से दहेज के खिलाफ अभियान आरंभ किया है तभी से कुछ और सामाजिक संगठनों की ओर से भी ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि दहेज का लेना और देना दोनों बंद हो क्योंकि वह इस बात को गंभीरता से समझ चुके हैं कि दहेज एक ऐसा दानव है जो आए दिन ना जाने कितने रिश्ते को जलाकर खाक कर देता है और कितनी गरीब बेटियों की ज़िन्दगीयों को बर्बाद कर चुका है. ऐसे में सामाजिक संगठनों की ओर से भी दहेज के खिलाफ आवाज बुलंद की गई है. इस अभियान में लोग तेजी से जुड़ रहे हैं क्योंकि वह जानते हैं कि दहेज को समाप्त करने के लिए अब जमीनी स्तर पर कार्य करने की जरूरत है.
वैसे तो फ़िलहाल मुहिम दहेज के ख़िलाफ़ है और ये भी सच्चाई है कि ये इतना आसान भी नहीं है कि दहेज को समाज से पूरी तरह से उखाड़ फ़ेंका जा सके लेकिन ये मुश्किल ज़रूर है मगर नामुमकिन नहीं है.यदि सभी मिलकर प्रयास करें तो फिर दहेज जैसे दानव को समाप्त किया जा सकता है.

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