Friday, July 30, 2021
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तो क्या आम आदमी पार्टी का भी सपा को रहेगा समर्थन?

अखिलेश यादव के गठबंधन फार्मूले में कौन -कौन होगा साथ

 ( शिब्ली रामपुरी ) 

कांग्रेस और बसपा से गठबंधन नहीं करेंगे लेकिन जितनी भी छोटी-छोटी पार्टियां हैं सब से हम गठबंधन करने के पक्षधर हैं. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इतना कहने के बाद से सपा के दरवाजे कांग्रेस और बसपा को छोड़कर सभी के लिए खुले हुए हैं और सपा की रणनीति यह है कि विधानसभा चुनाव में किसी भी तरह से भाजपा को शिकस्त देकर सत्ता तक पहुंचा जाए. लेकिन क्या यह इतना आसान रहने वाला है? यह तो आने वाला समय ही तय करेगा लेकिन फिलहाल जो कुछ समीकरण नजर आ रहे हैं उसके मुताबिक अखिलेश यादव के गठबंधन के जो दरवाजे खुले हुए हैं उसमें कई छोटी-छोटी पार्टियां शामिल होने का मन बना चुकी हैं. ताजा खबर के मुताबिक आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी अखिलेश यादव से मुलाकात की है. वैसे तो आम आदमी पार्टी यूपी की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है लेकिन यह सच्चाई भी अपनी जगह कायम है कि यूपी में आम आदमी पार्टी का कोई ख़ास जनाधार नहीं है और यहां पर संगठनात्मक तौर पर भी आम आदमी पार्टी काफी कमजोर है.उसके पास यूपी में ऐसे चेहरे नहीं हैं कि जो उसकी चुनावी नैया को पार लगाने में अहम किरदार निभा सकें. शायद यही सोचकर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने अखिलेश यादव से मुलाकात की है और आगामी विधानसभा चुनाव में रणनीति बनाने की तैयारी पर भी उनकी बातचीत हुई है. अखिलेश यादव के साथ रालोद का गठबंधन रहेगा यह तो तकरीबन तय माना ही जा रहा है वही भीम आर्मी की ओर से अभी तक कुछ कहा तो नहीं गया है लेकिन इतना जरूर है कि भीम आर्मी भी अखिलेश यादव के गठबंधन में शामिल हो सकती है. क्योंकि भीम आर्मी भी खुद को सियासी तौर पर मजबूत करना चाहती है जो अभी तक होता दिखाई नहीं दे रहा है भले ही चंद्रशेखर की चर्चा सियासत में आए दिन किसी न किसी रूप में होती रही हो लेकिन भीम आर्मी अभी तक भी वह स्थान नहीं बना पाई है जिसके लिए वह संघर्ष कर रही है. अखिलेश यादव के चाचा और पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव से भी अखिलेश हाथ मिलाना चाहते हैं लेकिन बताया जा रहा है कि काफी प्रयासों के बाद भी अखिलेश और शिवपाल यादव में राह हमवार नहीं हो सकी है और इसी का फायदा ओवैसी जैसे नेता उठाने की फिराक में जुटे हुए हैं. अखिलेश यादव को भले ही यूपी में छोटे-छोटे कई दलों का साथ मिल रहा है लेकिन जब से ओवैसी ने यूपी की 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है तभी से समाजवादी पार्टी में एक तरह से बेचैनी का माहौल है क्योंकि असदुद्दीन ओवैसी जिन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे वह मुस्लिम बाहुल्य सीटें होंगी तो जाहिर सी बात है कि इसका सीधा सा नुकसान अखिलेश यादव को ही होने वाला है. अब अखिलेश यादव से आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की मुलाकात किस हद तक पहुंचती है यह तो चंद दिनों में साफ़ हो जाएगा लेकिन इतना जरूर है कि अखिलेश यादव की गठबंधन की जो रणनीति है वह फिलहाल कारगर होती नजर आ रही है.

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