Thursday, May 6, 2021
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महात्मा गांधी ने ख्वाब में दी थी मौलाना वहीदुद्दीन खान को क़लम

हमेशा लगता रहा मौलाना पर आरएसएस और भाजपा के करीबी होने का आरोप

(शिब्ली रामपुरी) 

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मौलाना वहीदुद्दीन खान एक काबिल शख्स थे और उनकी काबिलियत उनके लेखों/तहरीरों से भी बयां होती थी. लेकिन यह भी अपनी जगह कड़वी सच्चाई है कि मौलाना वहीदुद्दीन खान में तमाम काबिलियत होने के बावजूद भी समाज में उनका काफी विरोध इस बात को लेकर रहा कि वह आरएसएस और भाजपा की जबान बोलते हैं या फिर उनके ज्यादा करीबी रहे हैं. हालांकि इसके जवाब में मौलाना वहीदुद्दीन खान स्पष्ट रूप से यह कहते थे कि मुझे तो राजीव गांधी सद्भावना अवार्ड भी दिया गया लेकिन तब किसी ने मुझे कांग्रेस का करीबी नहीं कहा लोग पता नहीं इस तरह की बातें कहां से ले आते हैं कि मैं आरएसएस और भाजपा का करीबी हूं जबकि मैं सिर्फ बातचीत का दामन कभी नहीं छोड़ता और ऐसा करके मैं अपने मजहब के नियमों पर ही अमल करता हूं क्यूंकि बातचीत से ही बड़ी-बड़ी समस्याओं का समाधान निकल सकता है. मौलाना वहीदुद्दीन खान ने कभी कलम का दामन नहीं छोड़ा आखिरी समय तक भी वो लिखते रहे उनके द्वारा संपादित अलरिसाला पत्रिका काफी पसंद की जाती है. मौलाना से जब इस बारे में पूछा जाता था कि आप इतनी उम्र होने के बावजूद भी इतना लिखते हैं और अमन और शांति की बातें लगातार करते हैं और अपनी ओर से अमन और भाईचारे के लिए प्रयास भी खूब करते हैं तो उसके जवाब में वह अपने एक ख्वाब का जिक्र किया करते थे. वह बताते थे कि मेरे ज़ेहन में अभी तक वह ख़्वाब बाक़ी है.जिसमें मैंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को देखा था कि मैं कहीं पर जा रहा हूं सड़क पर अकेले महात्मा गांधी बैठे हुए थे मैं उनके पास जाता हूं और वहां जाकर महात्मा गांधी के पास खड़ा हो जाता हूं कुछ देर चुप रहने के बाद महात्मा गांधी जेब से दो कलम निकालते हैं और मुझे देते हैं.इस ख्वाब का साफ सा इशारा यह था कि महात्मा गांधी जैसे अहिंसा के सबसे बड़े पुजारी का मुझे कलम देने के पीछे यही संदेश था कि मैं जो काम कर रहा हूं उसे हमेशा जारी रखूं. यही वजह है कि मैंने कलम का साथ कभी नहीं छोड़ा और अमन भाईचारे के पैगाम पर खूब लिखता रहा हूं और यह कोशिश मेरी हमेशा जारी रहेगी. मौलाना वहीदुद्दीन खान तीन तलाक के विरोध में भी हमेशा आवाज बुलंद करते रहे और जब यह मामला ख़ूब सुर्खियों में रहा था तब भी वह तीन तलाक के विरोध में अपनी बात रखते रहे. मौलाना वहीदुद्दीन खान ने जहां कई किताबें लिखी वही वह विभिन्न अखबारों में भी समय-समय पर लेख लिखते रहे जिन को काफी पसंद किया जाता रहा तो कुछ बातें मौलाना वहीदुद्दीन खान की लोगों को पसंद भी नहीं आई और उनके ही समाज के लोगों की ओर से उनकी कुछ बातों पर एतराज जताया गया.मौलाना वहीदुद्दीन खान के जाने से जो क्षति हुई है उसकी भरपाई निकट भविष्य में काफ़ी मुश्किल है.मशहूर इस्लामी विद्वान मौलाना वहीदुद्दीन खान के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है. पीएम मोदी ने कहा है कि धर्मशास्त्र और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा.

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