Friday, July 30, 2021
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यूपी में अखिलेश यादव की साईकिल की रफ्तार कम कर सकते हैं असदुद्दीन ओवैसी

सौ सीटों पर उतारे उमीदवार तो भाजपा को मिल सकता है बड़ा फ़ायदा

(शिब्ली रामपुरी) 

यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव साफ कर चुके हैं कि छोटे दलों से उनका गठबंधन होगा तो दूसरी और एमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी यूपी में 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर चुके हैं.एमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के मुताबिक गठबंधन किससे किया जाए अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है लेकिन हम यूपी की 100 मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर चुनाव लड़ने का पूरा मन बना चुके हैं. अखिलेश यादव ने यूं तो कांग्रेस और बसपा के अलावा सभी के साथ गठबंधन करने का इशारा दे दिया लेकिन ओवैसी से उनकी बात जम सकेगी इसके आसार काफी कम नजर आते हैं दूसरी ओर अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव से ओवैसी की अंदरूनी बातचीत चल रही है और माना जा रहा है कि उनके साथ ओवैसी का गठबंधन हो सकता है. काबिले गौर है कि यूपी के विधानसभा चुनाव 2017 में भी एमआईएम ने कुछ सीटों पर किस्मत आजमाई थी. लेकिन उस दौरान वह बुरी तरह से फ्लॉप रही थी. इस बार एमआईएम के हौसले जरा बुलंद है इसकी वजह बिहार के विधानसभा चुनाव में 5 सीटों पर एमआईएम के उम्मीदवारों की कामयाबी से ओवैसी पूरी तरह से अपना हौसला बुलंद रखते हुए यूपी की ओर रुख करने का काफी पहले ही ऐलान कर चुके हैं और हाल ही में 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की उनकी घोषणा से यूपी में सियासी हलचल तेज हो गई है. अखिलेश यादव की स्थिति यूपी में काफी मजबूत मानी जा रही है लेकिन जिस तरह से एमआईएम 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी तो इसका सबसे बड़ा फायदा तो भाजपा को होना तय है तो वही सबसे बड़ा सियासी नुकसान अगर किसी को होगा तो वह समाजवादी पार्टी. बिहार में एमआईएम ने कांग्रेस और तेजस्वी यादव का सियासी गणित बिगाड़ दिया था लेकिन यूपी की अगर हम बात करें तो यहां पर कांग्रेस को भी ओवैसी से नुकसान होना तय है लेकिन यहां पर यह हकीकत भी नजरअंदाज नहीं की जा सकती है कि यूपी में कांग्रेस काफी कमजोर स्थिति में है हालांकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी काफी मेहनत कर रही है और वह सियासी मुद्दों पर काफी फोकस करती हैं. लेकिन इसके बावजूद भी कांग्रेस यूपी के विधानसभा चुनाव में कोई करिश्मा कर सकेगी इसकी उम्मीद फिलहाल तो कम ही नजर आती है. जहां तक अखिलेश यादव से गठबंधन की बात है तो राष्ट्रीय लोकदल से लेकर कुछ और छोटी पार्टियां भी अखिलेश यादव से गठबंधन तय मान रही हैं जिसमें भीम आर्मी का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है समझा जा रहा है कि भीम आर्मी भी अखिलेश यादव के साथ मिलकर खुद को यूपी में मजबूत करने का प्रयास करेगी. अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा चुनाव में जो फार्मूला तय किया है वह यादव मुस्लिम और जाट फार्मूला है लेकिन अखिलेश के मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने में एमआईएम कोई कसर बाकी नहीं रखेगी और 100 सीटों पर उम्मीदवार अगर एमआईएम की तरफ से उतारे जाते हैं तो इसका सीधा सा नुकसान अखिलेश यादव को होगा और एमआईएम के उम्मीदवार कामयाब हो ना हों लेकिन वह अखिलेश यादव के जो उम्मीदवार होंगे उनको शिकस्त देने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे जाहिर सी बात है कि वोटों का बंटवारा होगा और इसका सीधा फायदा भाजपा को ही होने वाला है. जहां तक अपने चाचा शिवपाल यादव की बात है तो उन से गठबंधन का इशारा अखिलेश यादव ने एक टीवी इंटरव्यू में दिया था लेकिन कहा जा रहा है कि अभी भी दोनों के बीच तल्ख रिश्ते हैं और इसी को देखते हुए ओवैसी शिवपाल यादव से हाथ मिलाने की काफी कोशिशों में जुटे हुए हैं. यहां यह बात भी उल्लेखनीय है कि देश का सबसे बड़ा राज्य यूपी सियासत में काफी अहम स्थान रखता है और यहां की सियासत दूसरे राज्यों से काफी हटकर है जिस तरह से ओवैसी को बिहार के विधानसभा चुनाव में कामयाबी मिली थी उस तरह से यूपी में कामयाबी मिलना काफी कठिन है लेकिन इतना जरूर है कि ओवैसी खुद भले ही यूपी में फ्लॉप हो जाएं लेकिन वह अखिलेश यादव की कामयाबी की राह में रुकावट पैदा कर सकते हैं. अब इस पर निगाहें लगी हुई है कि क्या अखिलेश यादव का गठबंधन एमआईएम से भी हो सकता है?

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